प्रदेश के एक बड़बोले काबीना मंत्री पर तीखे व्यंग चकरघिन्नी.कॉम भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार खान आशु की धारदार कलम से……..
नाम की ही लाज रख ली होती……
तमगा राजकुमारों की तरह… नाम में जीत का दंभ… और पुछल्ला राजा महाराजाओं की तरह (वैसे मालवा निमाड़ में यह सरनेम फकीरों की जागीर में है…!
मुंह की बवासीर पुरानी है…! जब खोलते हैं, गंदगी टपकाना आदत है….! दिमाग तक छाया हुआ पद का सुरूर… और उस पर घटिया शराब का नशा… सोचने, समझने, बोलने की ताकत कहां बाकी रह पाती है…! अपना, पराया, दोस्त, दुश्मन, पक्ष या विपक्ष तक भी ठीक है, इन्हें तो अपने आकाओं और पार्टी मुखिया तक की इज्जत या सम्मान का पास तक नहीं रहता है…! महिलाओं के मान, सम्मान, उनके सशक्तिकरण और उनके लिए आत्मसम्मान की स्थितियां बनाने में बहुत आगे बढ़ चुकी पार्टी के यह “सम्माननीय सदस्य(?)” इस पार्टी पर कितना अमल करते हैं, इसका उदाहरण वे अपने “बवासीर युक्त मुख” से बार बार पेश करते रहे हैं…!
पहले मुंह खोला था, तो प्रदेश मुखिया की अर्धांगिनी के लिए बोले शब्दों से घटिया मानसिकता छलकाई थी…! बदले में राजसी ठाठ से हाथ धो बैठे थे….! अबकी बार मुंह खुला है तो एक ही बार में देश के मुखिया, जिन्होंने सारी दुनिया में अपने खास अंदाज का डंका बजाया है, को कटघरे में खड़ा कर दिया है…! देश की वह बेटी, जिसने अपने देश के गुनाहगारों को उनकी दहलीज पर जाकर ललकारा है, को जलील और शर्मिंदा कर दिया है…! देश के उन लोगों को घटिया शब्दों से पुकारा है, जिन्होंने बंटवारे के नाम पर इस सरजमीं को चुना था…! देश के बिगड़े माहौल के सुधरते और स्थिर होते जा रहे हालात में चिंगारी भड़काने में इस लायक(?), समझदार(?), वतनपरस्त(?) इंसान ने कसर नहीं छोड़ी है…!
अब बारी उन लोगों की है, जिनके हाथ में फैसले का चाबुक है…! देश के मुखिया को बदनाम करने और उनके प्रयासों को धक्का लगाने… एक महिला के लिए अपशब्द, अभद्रता, अपमान के बोल बोलने… देश की एकता और अखंडता को दांव पर लगाने… सीमा पर अपने देशवासियों के लिए जान की बाजी लगाने वालों को कटघरे में खड़ा करने… जैसे कई मामले हैं…! पद से हटा दिया जाना, चुनाव लड़ने से वंचित किया जाना, पार्टी कार्यालय की दहलीज चढ़ने से रोकना… इतना सब कुछ तो कम ही होगा, इन गुस्ताखियो के गुनाहगार के लिए…! सजा देने वाले कदम बढ़ाएं, फैसला करें, दलील पेश करें और आगे के लिए एक नजीर बना दें, इस शख्स के लिए देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने, उसे सामान्य कैदियों की जेल में बंद करने और किसी आम मुलजिम की तरह अदालत के धक्के खाने से कम कुछ नहीं होना चाहिए…!
पुछल्ला
नाराजगी तो पनपेगी!
एक समुदाय विशेष नहीं, बल्कि सारा देश उस महिला के सम्मान में खड़ा है, छाती चौड़ी कर रहा है, फख्र महसूस कर रहा है। किसी एक सिरफिरे की तुनक ने देश को नाराज किया है। सियासत, उलेमा, सामाजिक संगठन, आमजन, हर वर्ग और संप्रदाय नाराज है। नाराजगी और बढ़ेगी, इसका समय पर और तात्कालिक फैसला नहीं लिया गया तो…!