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स्वास्थ्य

शुगर ब्लड प्रेशर सहित हार्ट के मरीजों के लिए प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अशोक जैन ने जारी किया रमजान चार्ट

धार।
मुस्लिम समाज का पवित्र माह रमजान शुरू हो चुका है जिसमे बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज जन रोजे रखने के साथ ही एक माह तक इबादत में मशगूल रहते हैं।बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज बीपी या अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं ऐसे लोगों ओर रोजदारों के लिए धार जिले के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ.अशोक जैन व उनकी टीम ने एक प्लान तैयार किया है इस पूरे चार्ट को मुस्लिम समाज के बड़े धर्मगुरुओं की तस्दीक के बाद जारी किया गया है।
प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ.जैन की रिचर्स सामान्य रोजेदार व शुगर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है रिसर्च में सुबह सेहरी से लेकर रात तराबीह की नमाज तक का शेड्यूल तय किया गया है जिससे रोजदारों को काफी आसानी होगी।

जीवन शैली को समझकर सामंजस्य बैठाकर स्वस्थ्य रहकर रखे रोजे-
डॉ.अशोक जैन ने बताया कि रोजे से पहले डायबिटीक पेशेंटस को हाई रिस्क मीडियम रिस्क व लो रिस्क में बांटा गया है।
हाई रिस्क को रोजा ना रखने की सलाह है वही मीडियम व लो रिस्क सावधानी के साथ रोजा रख सकते हैं हमारा प्रयास भी यही है कि मरीज को उचित सलाह देकर बिना परेशानी के रोजा पूरा करवा सकें।

 

डॉक्टर की सलाह यह लोग नहीं रखें रोजा-
डॉ अशोक जैन ने बताया कि काफी उम्र दराज व कमजोर लोग रोजा नहीं रखें इन्सुलिन पर निर्भर डायबिटिक बच्चे मानसिक रोग से पीड़ित व्यक्ति ऐसे लोग जिन्हें शुगर के साथ कई गंभीर बीमारियां हैं और उन्हें टाईम पर दवाई खाना पानी ओर आराम की जरूरत है। गर्भावस्था के दौरान शुगर होने पर महिलाएं रोजा नहीं रखें वही इन्सुलिन पर निर्भर डायबिटीज पेशेंट जिनका शुगर लेवल बार-बार कम ज्यादा होने की तकलीफ हो ऐसे शुगर से पीड़ित लोग जो लगातार यात्रा करते हैं वहीं ऐसे लोग जिनकी शुगर कंट्रोल में नहीं आती और वो अकेले रहते हैं ऐसे लोग हाई रिस्क में रखे गए हैं और इन्हें रोजा नहीं रखने की सलाह दी गई है।

मीडियम ओर लो-रिस्क शुगर पेशेंट ऐसी दिनचर्या से रखे रोजे-

डॉ. जैन ने मीडियम और लो-रिस्क शुगर पेशेंट को सलाह दी है कि
शहरी से इफ्तार तक दिन भर अपने सामान्य कार्य करें ज्यादा शारीरिक व मानसिक थकान और ज्यादा धूप गर्मी से बचें। जोहर से असर की नमाज के बीच नींद लें रोजा इफ्तार से पहले शुगर की जांच करके नोट करें इसे फास्टिंग ब्लड शुगर कहा जाएगा इफ्तार से पहले ज्यादा मेहनत व व्यायाम से बचें इफ्तार में शुगर के मुताबिक खाना व दवाई ले।
शुगर पीड़ित व्यक्ति को रमजान के दौरान भी ज्यादा मीठा नमकीन ज्यादा मसालेदार तला हुआ भारी भोजन व जंक फूड कोल्ड ड्रिंक नहीं लेना चाहिए डॉक्टर के बताए अनुसार दवाओं के समय में बदलाव कर सकते हैं सुबह की दवाएं व इंसुलिन इफ्तार के वक्त व शाम की दवाई सहरी के वक्त डॉक्टर के परामर्श से ले सकते हैं इफ्तार के बाद व तराबी की नमाज के बीच में पैदल चलना बेहतर है इफ्तार के ठीक 2 घंटे बाद ब्लड शुगर चेक करें जिसे PPBS(खाने के बाद) की शुगर कहा जाएगा।

रोज़े की हालत में शुगर कम या ज्यादा हो तो क्या करें-

डॉ. अशोक जैन के मुताबिक रोजे में किसी का शुगर लेवल कम हो जाए या मरीज को आँखों से धुँधलापन ठंडा पसीना ज्यादा भूख महसूस हो कंपकपी छूटना सर दर्द घबराहट चिड़चिड़ापन ज्यादा नींद या बेहोशी हो तो तुरंत शुगर लेवल चेक करें।
अगर मरीज का शुगर लेवल 80-90 से नीचे हो तो रोजा तोड़कर मरीज को ग्लूकोज शक्कर बिस्किट या मीठी चाय पिला दें व आराम करने के बाद फिर शुगर लेवल चेक करें मरीज को बेहोशी की हालत में उसे ग्लूकोज या डेक्स्ट्रोज की बोतल लगानी होगी।
अगर शुगर लेवल बार बार 80-90 से कम या 200-250 से ज्यादा रहे तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।

रिचर्स के मुताबिक तेज गर्मी में सामान्य व शुगर के मरीज कुछ सावधानियां बरत कर स्वस्थ तरीके से रोजे पूरे कर सकते हैं।जैसे कि तरावीह की नमाज के बाद रसीले फल पानी फीका दूध समय पर नींद लेना जरूरी है।
शुगर पीड़ित अपने सोने के समय बेवजह घूमने फिरने सामजिक मेलजोल करने शॉपिंग करने बार बार नाश्ता करने जंक फूड कोल्ड्रिंक व ज्यादा मोबाइल देखने से बचे वही सिगरेट गुटका पाउच का उपयोग नही करें सेहरी में अपनी दवाएं फल पानी उचित मात्रा में लें।

रमजान चार्ट को लेकर क्या कहते है मुस्लिम विद्वान-

भोपाल के मुफ़्ती-ए-शहर मो.साजिद रजा मिस्बाही ने बताया कि रोजा रखने के बहुत फायदे हैं जो साइंस से भी साबित है।
इंसान जब रोजा रखता है तो वह गरीबों की भूख प्यास ओर तकलीफ समझ पाता है।
आपने बताया कि कुछ लोग जिन्हें इजाज़त है कि वह फिलहाल रोजा न रखे लेकिन बाद में वो रोजे पूरे करे जैसे कि जिन्हें लगातार दवाई व खाना लेना पड़ता हो ज्यादा बीमार बूढ़े गर्भवती महिला लगातार सफर में रहने वाले इंसान के लिए बाद में रोजे रखने का हुक्म है।
वही मुफ़्ती मिस्बाही साहब ने बताया कि रोजे की हालात में ब्लड शुगर टेस्ट करवाने से रोजा नहीं टूटता है क्योंकि इनमें खून बाहर निकलता है रोजा तब टूटेगा जब कुछ चीज अंदर जाएगी।
मुस्लिम समाज जनों का रमजान में बिना रुकावट रोजा पूरा करवाने के लिए डॉ.अशोक जैन की रिसर्च और मेहनत को लेकर मुफ्ती साजिद मिस्बाही ने उनकी प्रशंसा करते हुए धन्यवाद दिया है।
उन्होंने कहा कि डॉ.जैन का रमजान चार्ट हर डायबिटिक पेशेंट को पड़ लेना चाहिए इसकी रोशनी में वो बहुत आसानी के साथ अपने रोजे पूरे कर सकते हैं।
डॉ. अशोक जैन साहब ने जो चार्ट बनाया है वो बहुत बेहतर है और इसमें रोजे की हालत में दिन गुजारने का जो तरीका बताया गया है वह रोजेदारों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।

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